सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सडक दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की जान बचाने के उद्देश्य से जारी की गई राह-वीर योजना





REPORT BY  : RAHUL SAHAJWANI

यमुनानगर CITY LIFE HARYANA  ||  पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि सडक परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सडक दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों की जान बचाने के उद्देश्य से राह-वीर (गुड समेरिटन) योजना जारी की गई है, जो 31 मार्च, 2026 तक लागू रहेगी। 

योजना के अनुसार राह-वीर (गुड समेरिटन) वह व्यक्ति होता है, जो स‌द्भावनापूर्वक, स्वेच्छा से तथा बिना किसी पुरस्कार या मुआवजे की अपेक्षा के, दुर्घटना स्थल पर पीडित को आपातकालीन चिकित्सा या गैर-चिकित्सा देखभाल या सहायता प्रदान करता है या ऐसे पीडित को अस्पताल पहुँचाता है। इस योजना के अनुसार जो व्यक्ति मोटर वाहन से जुडी किसी गम्भीर दुर्घटना के पीडित को तत्काल सहायता प्रदान करके तथा दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर (गम्भीर चोट के बाद एक घंटे की अवधि) के भीतर अस्पताल पहुँचाकर उसकी जान बचाता है, वह व्यक्ति राह-वीर योजना के अंतर्गत पुरस्कार के लिए पात्र होगा।



पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने योजना के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए आगे बताया कि प्रत्येक राह-वीर के लिए पुरस्कार राशि प्रति घटना 25,000/- रूपये होगी, जो निम्नलिखित प्रावधानों के अधीन होगी :-


1.यदि एक राह-वीर मोटर वाहन से जुडी एक गम्भीर दुर्घटना में एक या अधिक पीडितों की जान बचाता है, तो पुरस्कार राशि 25,000/- रूपये मात्र होगी।

2.यदि एक से अधिक राह-वीर मोटर वाहन से जुडी किसी गम्भीर दुर्घटना में एक पीडित की जान बचाते हैं, तो पुरस्कार राशि अर्थात् 25,000/- रूपये उनके बीच बराबर-बराबर बाँटी जाएगी।

3.यदि एक से अधिक राह-वीर मोटर वाहन से जुडी किसी गम्भीर दुर्घटना में एक या अधिक पीडितों की जान बचाते हैं, तो पुरस्कार राशि प्रति बचाए गए पीडित व्यक्ति के लिए 25,000/- रूपये होगी, जो प्रति राह-वीर अधिकतम 25,000/- होगी।

4. प्रत्येक पुरस्कार के साथ एक सराहना प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।

5. व्यक्तिगत मामलों में पुरस्कार के अतिरिक्त, सर्वाधिक योग्य राह-वीरों (जिनका चयन पूरे वर्ष के दौरान सम्मानित किए गए लोगों में से किया जाएगा) के लिए प्रतिवर्ष 10 राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार दिए जाएंगे और प्रत्येक को 1,00,000/- रूपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

राह-वीर (गुड समेरिटन) कानून के अनुसार, अस्पताल / पुलिस स्टेशन राह-वीर को अनावश्यक रूप से रोक कर नहीं रख सकते। योजना के अनुसार राह-वीर जब तक स्वयं न चाहें, उन्हें व्यक्तिगत जानकारी प्रकट करने की आवश्यकता नहीं है तथा न हीं उन्हें गवाही देने के लिए बाध्य किया जा सकता है।

अंत में गोयल द्वारा जिलावासियों, विशेषतौर पर युवाओं से राह-वीर बनने की अपील की, ताकि सडक दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल अधिक से अधिक व्यक्तियों की जान बचाई जा सके।



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